Tuesday, December 14, 2010

Bengaluru, मेरे सपनो का शहर

Bengaluru, मेरे सपनो का शहर,
जिसकी हवाओं में, मैं साँस लेती हूँ
जिसकी सड़कों पर, मैं मीलों चलती हूँ

पहली बार जब मेरे कदम
यहाँ पड़ें
जाने क्यों मेरे दिल ने कहाँ
ये शहर तेरा अपना है मधु
वो सांझ का समय
रुकती थिरकती महकती बूंदें
धुली धुली पेड़ों की पत्तियां
और खिले खिले रंग बिरंगे फूल
मेरे होटों पर हंसी छलक गई
Delhi की तपतपाती धूप से
सुहावने मौसम में आ गई

एक तमन्ना थी मेरी
यहाँ अपना आशियाना बनाने की
पर ६ साल में,
ये शहर और मैं दोनों ही बदल गए
इस शहर ने अपनी खूबसूरती खो दी
और मैंने आशियाना बनाने की तमन्ना
ऊँचे ऊँचे पुराने बरगद के पेड़ कट गए
सड़के चौड़ी हो गई और
छायें खो गई
यूहीं मैं बारिश के बाद निकल जाती थी सड़कों पर
पेड़ों से टपकती बूंदें मेरे गालों को भिगों देती
और मेरी हथेलियों में सिमट जाती
अब...बारिश होती है तो
बालकनी मैं बैटकर
तुलसी की पत्तियों को निहारती रहती हूँ

इमारते ऊँची और ऊँची होती जा रही है
चिड़ियाँ तो पहले ही नहीं थी
अब कबूतर भी कम होते जा रहे हैं
आकाश
नगा सा खड़ा रहता है दिनभर
कभी कभार बस एक चील उडती दिखाई देती है
कुछ सालों पहले,
एक कोयल का घोसला था कहीं आस पास
ढलती हुई शाम
हाथ में गर्म चाय का प्याला
और मुझसे कुछ कहती वो मासूम कोयल
जैसे कुछ कुरेदती थी मेरे अन्दर
बेसुरी सी शाम में संगीत घोलती थी वो
अब जाने कहाँ खो गई है

बाकी शहरों की तरह इस शहर में ,
जहाँ देखों बस रोशनी ही रोशनी है
इतनी रोशनी की तारे कहीं खो गए हैं
चाँद अकेला आसमान में अंगडाई लेता है
कभी रूठा सा मुझसे
कभी शिकायत करता मुझसे
इतने सारे घर बदले मैंने इस शहर में
पर मैं चाँद को और चाँद मुझे ढूँढ ही लेते हैं
सुनसान सी रातों में वो मेरे पास आकार बैठ जाता है
मैं कभी खिलखिलाती नाचती हुई उसकी चांदनी में
कभी सिसक सिसक रोती हूँ रातभर उसकी गोद में

Bengaluru, मेरे सपनो का शहर,
जिसकी हवाओं में मैं साँस लेती हूँ
जिसकी सड़कों पर मैं मीलों चलती हूँ

ये शहर साक्षी है,
मेरी ढलती हुई उम्र का, टूटते पुराने रिश्तों का
और जन्म लेती नई आशाओं का
कितने अलग अलग लोग मिले यहाँ मुझे
किसी के साथ एक कदम चली
और कभी बस एक मुस्कराहट भर का साथ रहा
कभी किसी का हाथ पकड़, कभी अकेले
मैं तलाशती रही अपनी ज़िन्दगी के मायने
ना इसे पता है कि इसकी मंजिल क्या है
ना मुझे पता है मुझे जाना कहाँ है
मैं इससे कुछ कहती हूँ ये मुझसे कुछ कहता है
बस चल रहे हैं बस चल रहे हैं दोनों

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